पुनः सोचा था "प्र" को "प" लिखा जाए तो अंगहीनता का अहसास हो सकेगा। लेकिन........
जाके पाँव ना फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई।
और
जाके होय ना पाँव गोसाई, वो क्या जाने फटी बिवाई॥
FOR SPECIAL CHILDREN
पुनः सोचा था "प्र" को "प" लिखा जाए तो अंगहीनता का अहसास हो सकेगा। लेकिन........
जाके पाँव ना फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई।
और
जाके होय ना पाँव गोसाई, वो क्या जाने फटी बिवाई॥