मंगलवार, जनवरी 18, 2011

जयपुर में आमेर पर्यटन ? ना बाबा ना...



मॉन्यूमेंट्स पर एंट्री है जबर्दस्त चैलेंज


फिजिकली चैलेंज्ड को कुछ स्थानों पर व्हील चेयर उठाकर सीढिय़ां पार कराई जाती हैं


शहर के सभी मॉन्यूमेंट्स पर नहीं है फिजिकली चैलेंज्ड के लिए रैंप व्यवस्था


पर्यटन स्थलों पर सैर के साथ रोमांच का भी अपना मजा है, लेकिन फिजिकली चैलेंज्ड पर्यटकों के सामने सबसे बड़ा एडवेंचर तो उनका इन स्थानों में प्रवेश करना है। वजह है रैम्प की कमी। जयपुर शहर में रोज लाखों रुपए की आय कराने वाले ज्यादातर मॉन्यूमेंट्स पर फिजिकली चैलेंज्ड लोगों के रैम्प नहीं बने हुए। ऐसे कई पर्यटकों को व्हीलचेयर के साथ उठाकर सीढिय़ां तय करानी पड़ती हैं। इसमें रिस्क इतना है कि अगर थोड़ा भी चूके तो पर्यटक को ज्यादा नुकसान हो सकता है। हालात ये हैं कि विभाग ने अल्बर्ट हॉल पर तो लकड़ी का रैम्प बनाकर ऐसे लोगों को राहत दी है वहीं आमेर जैसे पर्यटन के सबसे प्रमुख स्थान पर कुछ समय पहले गणेशपोल के दोनों ओर बने रैम्प को तोड़ दिया गया।
सिर्फ आमेर ही नहीं, यह स्थिति लगभग सभी मॉन्यूमेंट्स की है। बात अगर आमेर से शुरू की जाए तो वहां पर कुछ समय पहले गणेश पोल के दोनों ओर रैम्प बने हुए थे, लेकिन दीवाने आम के सामने जब रेस्टोरेशन वर्क हुआ तो रैम्प को तोड़कर हटा दिया गया। अब पर्यटकों को व्हीलचेयर उठाकर सीढिय़ां पार करनी पड़ती हैं, ऐसे में हमेशा चोट लगने का खतरा बना रहता है। यहां प्रवेश का सबसे अहम रास्ता ही गणेशपोल है। उसी तरह पहले सुखनिवास से शीशमहल के बीच रैंप बना था जिसे भी तोड़ दिया गया। जब इस बारे में वहां के सुपरिंटेंडेंट जफरउल्लाह खान से पूछा गया तो वे कहते हैं कि महल में जहां भी इसकी जरूरत है वहां रैम्प बने हुए हैं। जलैब चौक से सिंघपोल गेट, सिंघपोल गेट के अंदर से दीवाने खास, दीवाने खास से मानसिंह महल तक रैम्प बने हुए हैं, लेकिन गणेश पोल के रैम्प के बारे में उन्हें लगता है वहां इसकी जरूरत ही नहीं है। वैसे महल में फिजिकली चैलेंज्ड लोगों के लिए बना रैम्प शिलामाता मंदिर का प्रवेश द्वार ही जिसे महल प्रशासन अपना मानते हैं लेकिन वो इस तरह से बना हुआ है कि थोड़ी सावधानी हटी आदमी लुढ़ककर सीधा जलेबचौक तक पहुंच जाएगा। हाल ही में इस रास्ते को मंदिर के ठीक सामने से सीढिय़ां हटाकर महल से जोड़ा गया है जो बहुत ही ज्यादा ढलान वाला है जहां से आना-जाना सहज नहीं है।

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