शनिवार, अक्तूबर 06, 2012

घायल को लेकर उल्टी दिशा में क्यों दौड़ती है '108' एंबुलेंस

 निजी अस्पताल में क्यों ले जाते हैं ?

राजस्थान में जयपुर के शिवपुरी एक्सटेंशन कॉलोनी निवासी सीए छात्र पीयूष शर्मा (20) का 26 अप्रैल को कालवाड़ रोड (पंखा कांटा) के पास एक्सीडेंट हुआ। किसी राहगीर की सूचना पर 108 एंबुलेंस आई। एंबुलेंस घायल छात्र को शहर की ओर आने के बजाय करीब 10 किलोमीटर दूर हाथौज स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंच गई।
तड़पते बेटे का दर्द
अस्पताल वालों की ओर से मरीज के पैर का ऑपरेशन करने की बात कही। तब तक दुर्घटनाग्रस्त छात्र के पिता अस्पताल पहुंच चुके थे। पीयूष बार-बार कहता रहा कि उसके सीने में भयानक दर्द हो रहा है। वहां इलाज की माकूल व्यवस्थाएं नहीं थी, पिता से तड़पते बेटे का दर्द देखा नहीं गया। उन्होंने दुबारा 108 एंबुलेंस को फोन कर बुलाया तो वही एंबुलेंस आ गई। इस पर पिता आरपी शर्मा बेटे को लेकर एसएमएस की ओर रवाना हुए, लेकिन बीच रास्ते में ही पीयूष की मौत हो गई।
जानकर दंग रह गए
बेटे की मौत में गमजदा शर्मा तब कुछ नहीं कर पाए। बाद में उन्होंने पीयूष के एक्सीडेंट होने से करीब दस किलोमीटर विपरीत दिशा में जाने के घटनाक्रम का पता लगा तो वे यह जानकर दंग रह गए कि एंबुलेंस घायल को वहां लेकर ही कैसे गई। दरअसल अव्वल तो इतनी ही दूरी पर शहर की ओर एसएमएस अस्पताल था। वहीं इस अस्पताल के बजाय रास्ते में तीन से पांच किलोमीटर की दूरी पर खंडाका, चौहान, दीप, सोनी अस्पताल थे। आरोप है कि मौजूदा अस्पताल से यहां इलाज के बेहतर विकल्प मौजूद हैं।
एंबुलेंस सेवा सवालों के कठघरे में
इस घटनाक्रम से आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा सवालों के कठघरे में है। सवाल लाजिमी है कि क्या 108 एंबुलेंस में कार्यरत स्टाफ  को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर वहां ले जाने के पीछे उनका कोई निहित स्वार्थ था? इस बारे में मृतक पीयूष के पिता ने कई बार 108 के अफसरों से जानकारी चाही, जिसका उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
निजी अस्पताल लेकर जाते हैं
उधर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने स्पष्ट कहा कि अव्वल तो घायल मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही ले जाना चाहिए, वहीं अगर निजी अस्पताल लेकर जाते हैं तो इसके लिए मरीज के परिजनों की सहमति जरूरी है। हालांकि इस मामले में घायल को बड़े निजी अस्पताल ले जाने के बजाय इनकी अपेक्षा कमतर स्वास्थ्य सेवाओं वाले निजी फ्रैक्चर अस्पताल में ही ले जाया गया।

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